दिल्ली चिड़ियाघर में 13 वर्षों का सूखा होगा खत्म
नई दिल्ली। राष्ट्रीय प्राणी उद्यान (चिड़ियाघर) में अब आंगुतकों को जल्द ही जेब्रा देखने को मिलेगा। 13 वर्षों से चिड़ियाघर में सैलानी जेब्रा का दीदार करने का इंतजार कर रहे हैं। 2011 में यहां आखिरी बार सैलानियों ने जेब्रा को देखा था। चिड़ियाघर प्रशासन अब गुजरात से दो जोड़ी जेब्रा लाने की तैयारी कर रहा है। इसमें दो नर और दो मादा जेब्रा लाए जाएंगे। जेब्रा के बाड़े का भी पुननिर्माण की तैयारी हो रही है। आखिरी बार चिड़ियाघर में जेब्रा अमेरिका से लाए गए था। जिसे अमेरिका ने तोहफे में दिए थे। अमेरिका ने वर्ष वर्ष 2007 में नर गैंडा के बदले दो मादा और एक नर जेब्रा दिया था। जिससे 2010 में एक नर जेब्रा पैदा हुआ था। 30 अप्रैल 2011 को उसकी पैरालिसिस के कारण मौत हो गई थी। चिड़ियाघर में पशुओं के प्रजनन को बढ़ाने और जेनेटिक पूल को बनाए रखने की प्रक्रिया पर काम हो रहा है। चिड़ियाघर की निदेशक आकांक्षा महाजन ने बताया कि चिड़ियाघर में लंबे समय से दो मादा गैंडा अंजूहा और उसकी मां माहेश्वरी है। 26 वर्षीय माहेश्वरी को गुवाहाटी स्थित चिड़ियाघर भेजा जाएगा और बदले में 18 वर्षीय अंजूहा के लिए वहां से नर गैंडा दिल्ली लाया जाएगा। चिड़ियाघर के अधिकारियों के मुताबिक माहेश्वरी अभी दो और बच्चों को जन्म दे सकती है। वहीं, दिल्ली चिड़ियाघर में दो मादा लकड़बग्घे भी हैं। इनके लिए भी छत्तीसगढ़ से एक नर लकड़बग्घा लाया जाएगा। चिड़ियाघर के अधिकारियों के मुताबिक गैंडे को उसके संरक्षण प्रजनन को बढ़ावा देने और लकड़बग्घा और चौसिंघा मृग को जोड़ा बनाने, प्रजनन और शैक्षिक उद्देश्यों के लिए खरीदा जा रहा है।
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