RTI पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा दखल, स्टॉक एक्सचेंज को लेकर हाईकोर्ट के फैसले पर रोक
नई दिल्ली| देश की शीर्ष अदालत (सुप्रीम कोर्ट) ने दिल्ली उच्च न्यायालय के उस चर्चित फैसले पर फिलहाल अंतरिम रोक लगा दी है, जिसमें नेशनल स्टॉक एक्सचेंज ऑफ इंडिया (NSEI) को सूचना का अधिकार (RTI) अधिनियम के अंतर्गत 'पब्लिक अथॉरिटी' (सार्वजनिक प्राधिकरण) घोषित किया गया था। सर्वोच्च अदालत ने इस मामले में सुनवाई के लिए याचिका को स्वीकार करते हुए केंद्रीय सूचना आयोग (CIC) और अन्य संबंधित पक्षों से नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है। इस मामले की अगली सुनवाई अब से चार सप्ताह बाद मुकर्रर की गई है।
सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने क्या कहा?
न्यायमूर्ति विक्रम नाथ और न्यायमूर्ति संदीप मेहता की अवकाशकालीन व नियमित पीठ ने एनएसईआई की विशेष अनुमति याचिका पर सुनवाई करने पर अपनी सहमति जताई। पीठ ने केंद्रीय सूचना आयोग सहित तमाम प्रतिवादियों को अपना पक्ष रखने का निर्देश दिया है और मामले की आगामी सुनवाई चार सप्ताह बाद तय की है।
किस फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट पहुंचा NSEI?
एनएसईआई ने दिल्ली हाईकोर्ट की खंडपीठ (डिवीजन बेंच) के गत 1 जुलाई को सुनाए गए उस फैसले को चुनौती दी थी, जिसमें उसकी अपील को खारिज कर दिया गया था। दरअसल, एनएसईआई ने अप्रैल 2010 में एकल जज (सिंगल बेंच) द्वारा दिए गए निर्णय के खिलाफ अपील दायर की थी। सिंगल जज ने अपने आदेश में स्पष्ट किया था कि एनएसईआई आरटीआई कानून की धारा 2(h) के प्रावधानों के तहत 'पब्लिक अथॉरिटी' की परिभाषा के दायरे में आता है।
आरटीआई अधिनियम में 'पब्लिक अथॉरिटी' का क्या अर्थ है?
सूचना का अधिकार कानून के तहत देश के आम नागरिक केवल उन्हीं संस्थाओं या निकायों से जानकारी मांगने का कानूनी हक रखते हैं जो 'पब्लिक अथॉरिटी' की श्रेणी में आती हैं। यही वजह है कि किसी भी संस्थान का इस दायरे में आना या न आना बेहद महत्वपूर्ण और दूरगामी परिणाम वाला माना जाता है।
हाईकोर्ट ने एनएसईआई को क्यों माना था 'पब्लिक अथॉरिटी'?
दिल्ली हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने अपने फैसले में तर्क दिया था कि यदि किसी संगठन का मालिकाना हक, उसका प्रशासनिक नियंत्रण या उसे मिलने वाली फंडिंग सीधे तौर पर सरकार से जुड़ी हुई है, तो उसे वैधानिक रूप से 'पब्लिक अथॉरिटी' माना जाएगा।
प्रशासनिक नियंत्रण को लेकर अदालत की टिप्पणी
खंडपीठ ने अपने निर्णय में यह भी रेखांकित किया कि सिंगल जज ने अपने फैसले में यह सही निष्कर्ष निकाला था कि एनएसईआई सरकार के नियंत्रण के अधीन है और अदालत इस निष्कर्ष से पूरी तरह सहमत है। इसके विपरीत, स्टॉक एक्सचेंज ने शुरू में सिंगल जज के समक्ष केंद्रीय सूचना आयोग (CIC) के उस आदेश को चुनौती दी थी जिसमें उसे आरटीआई के दायरे में लाने की बात कही गई थी, और दलील दी थी कि वह इस अधिनियम के तहत पब्लिक अथॉरिटी नहीं है।
पूरे क्षेत्र को स्वास्थ्य सेवाओं से कवर करें, शत-प्रतिशत टीकाकरण एवं गर्भवती महिलाओं का समय पर पंजीयन एवं एएनसी जांच सुनिश्चित हो: उप मुख्यमंत्री शुक्ल
"हम सब बराबर, बराबर हमारे अधिकार" के ध्येय वाक्य को चरितार्थ कर रहा है मध्यप्रदेश मानवाधिकार आयोग : मुख्यमंत्री डॉ. यादव
लगातार दो वर्ष देश में सर्वाधिक रिकवरी दर, यह किसानों की मेहनत का परिणाम है - उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा
नशे के अवैध कारोबार के विरुद्ध कार्रवाई को मिशन के रूप में लेकर कार्य करें-उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा
केन बेतवा लिंक परियोजना के क्रियान्वयन से बुंदेलखंड क्षेत्र में आयेगी खुशहाली : मुख्यमंत्री डॉ. यादव
प्रदेश की लाडली बहना लाभ लेने वाली नहीं, अब बन रही है लाभ कमाने वाली: मुख्यमंत्री डॉ यादव
महिला अस्पताल में 100 सिजेरियन का लक्ष्य, निजी विशेषज्ञ भी किए अनुबंधित
दिल्ली में एयर इंडिया के पायलट की होटल में संदिग्ध परिस्थितियों में मौत, कमरे में मिला शव
लंबी कानूनी लड़ाई के बाद वैध भूमि स्वामी को मिला भौतिक कब्जा
टीबी खत्म करने के लिए दक्षिण-पूर्व एशिया क्षेत्र में तेज कार्रवाई का संकल्प, डब्ल्यूएचओ ने बनाई नई रणनीति