Women's T20 World Cup: चोटिल खिलाड़ियों के चयन पर भड़के सुनील गावस्कर, पूछे कई सवाल
महिला टी20 विश्व कप 2026 में भारतीय टीम का सफर ग्रुप स्टेज में ही समाप्त हो जाने के बाद से क्रिकेट गलियारों में तीखी चर्चाएं शुरू हो गई हैं। ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ करो या मरो के मुकाबले में मिली शिकस्त के बाद भारत सेमीफाइनल की रेस से पूरी तरह बाहर हो गया। हालांकि, भारत के पूर्व महान बल्लेबाज और कप्तान सुनील गावस्कर का मानना है कि भारतीय टीम की असली हार ऑस्ट्रेलिया से नहीं, बल्कि दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ मैच में हुई थी। उन्होंने टीम की लचर फील्डिंग, लचर रणनीति और खिलाड़ियों की फिटनेस को आड़े हाथों लेते हुए यह बड़ा सवाल उठाया है कि क्या वाकई मैदान पर पूरी तरह फिट खिलाड़ियों को ही उतारा गया था?
दक्षिण अफ्रीका से मिली शिकस्त थी असली टर्निंग पॉइंट
गावस्कर ने अपने विश्लेषण में कहा कि मजबूत ऑस्ट्रेलियाई टीम से हारना कोई बहुत बड़ा उलटफेर नहीं था, लेकिन दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ मैच गंवाना सबसे बड़ी गलती साबित हुई। उन्होंने खेल जगत के एक कॉलम में लिखा, "भारतीय महिला टीम का ऑस्ट्रेलिया से हारना कोई अप्रत्याशित बात नहीं थी, लेकिन इसने स्थिति को और खराब कर दिया। भारत को हर हाल में दक्षिण अफ्रीका को शिकस्त देनी चाहिए थी, लेकिन उस मुकाबले में फील्डिंग का स्तर इतना खराब था कि अच्छी स्थिति में होने के बावजूद बाजी हाथ से निकल गई। उसी खराब प्रदर्शन ने भारत के सफर को लगभग वहीं समाप्त कर दिया था।"
चोटिल खिलाड़ियों को खिलाने पर उठाए तीखे सवाल
क्या छिपाई गई खिलाड़ियों की चोट?
दिग्गज गावस्कर ने मैच के दौरान खिलाड़ियों की शारीरिक फिटनेस पर गहरी चिंता जताई। उन्होंने लिखा, "बाहर बैठकर आलोचना करना बेहद आसान है, लेकिन हर भारतीय क्रिकेट प्रशंसक के जहन में यह सवाल जरूर उठेगा कि क्या मैदान पर उतरे सभी खिलाड़ी पूरी तरह फिट थे? मैदान पर कई खिलाड़ियों की उंगलियों और हाथों पर पट्टियां बंधी दिखीं, जिससे साफ लगा कि वे किसी न किसी चोट से जूझ रहे थे। अगर कोई बड़ा मैच-विनर खिलाड़ी थोड़ा चोटिल हो, तो उसे खिलाना समझ आता है, लेकिन अगर सामान्य खिलाड़ियों के साथ भी ऐसा है, तो इसका मतलब है कि हमारे रिजर्व बेंच की ताकत बेहद कमजोर है।"
मैदानी रणनीति में दिखी बड़ी खामियां
गावस्कर ने टीम प्रबंधन की रणनीतियों पर भी उंगली उठाई। उन्होंने कहा कि जब विपक्षी बल्लेबाज लगातार भारतीय स्पिन गेंदबाजों के खिलाफ एक्स्ट्रा कवर के ऊपर से हवाई शॉट खेलकर रन बटोर रहे थे, तब भी कप्तान और कोच ने उस दिशा में फील्डिंग को मजबूत करने की कोई कोशिश नहीं की। बल्लेबाजों को कोई चुनौती न देना टीम की बड़ी रणनीतिक चूक थी।
ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ मुकाबला: हरमनप्रीत की पारी गई बेकार
इस निर्णायक मुकाबले में भारत ने पहले बल्लेबाजी करते हुए कप्तान हरमनप्रीत कौर की मात्र 27 गेंदों में खेली गई 56 रनों की तूफानी पारी, साथ ही स्मृति मंधाना और शेफाली वर्मा के बहुमूल्य योगदान की बदौलत 4 विकेट पर 170 रनों का चुनौतीपूर्ण स्कोर खड़ा किया था।
जवाब में एक समय ऑस्ट्रेलिया ने 72 रनों पर 3 विकेट गंवा दिए थे, लेकिन इसके बाद एलिस पेरी और एशले गार्डनर के बीच हुई 100 रनों की शतकीय साझेदारी ने पासा पलट दिया। ऑस्ट्रेलिया ने 6 विकेट से यह मुकाबला जीतकर सेमीफाइनल में प्रवेश किया और भारत का विश्व कप जीतने का सपना एक बार फिर चकनाचूर हो गया।
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