पानी बचाने की बड़ी पहल, जेटली स्टेडियम में STP और रेन वाटर हार्वेस्टिंग का कमाल
नई दिल्ली: दिल्ली एवं जिला क्रिकेट एसोसिएशन (डीडीसीए) ने पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक बड़ा और सराहनीय कदम उठाया है. एसोसिएशन ने दावा किया है कि दिल्ली के प्रसिद्ध अरुण जेटली स्टेडियम में अब क्रिकेट मैदान और घास की सिंचाई के लिए कीमती भूजल (ग्राउंड वाटर) को बर्बाद नहीं किया जा रहा है. इसकी जगह अब स्टेडियम में ही स्थापित किए गए सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) से साफ और शोधित किए गए पानी का उपयोग किया जा रहा है. राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) के समक्ष पेश की गई एक आधिकारिक रिपोर्ट में एसोसिएशन ने स्पष्ट किया है कि यह एसटीपी पूरी तरह से चालू और संचालित स्थिति में है. इसके साथ ही पर्यावरण को सुरक्षित रखने के लिए स्टेडियम परिसर के भीतर कई अन्य महत्वपूर्ण बदलाव भी लागू किए गए हैं.
वर्षा जल संचयन के लिए बनाए गए 17 रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम
डीडीसीए के सचिव अशोक शर्मा ने इस संबंध में विस्तृत जानकारी साझा करते हुए बताया कि स्टेडियम परिसर के भीतर बारिश के पानी को बचाने और उसे जमीन के अंदर वापस भेजने के लिए 17 रेन वाटर हार्वेस्टिंग एवं रिचार्ज शाफ्ट तैयार किए गए हैं. इन सभी सिस्टमों का प्रत्येक वर्ष मानसून की शुरुआत से ठीक पहले विशेष तौर पर रखरखाव और सफाई की जाती है, ताकि बारिश की एक-एक बूंद का अधिकतम संरक्षण हो सके और जमीन के जलस्तर को सुधारा जा सके. उन्होंने यह भी बताया कि वर्तमान में दिल्ली जल बोर्ड (डीजेबी) से बकायदा अनुमति लेने के बाद ही परिसर में केवल दो ट्यूबवेल चलाए जा रहे हैं, जबकि नियमों का उल्लंघन रोकने के लिए तीसरे ट्यूबवेल को पूरी तरह सील कर दिया गया है. पानी की बर्बादी रोकने के लिए इन दोनों ट्यूबवेल पर फ्लो मीटर, पीजोमीटर और डिजिटल वाटर लेवल रिकॉर्डर जैसे आधुनिक उपकरण लगाए गए हैं जो भूजल स्तर पर चौबीसों घंटे निगरानी रखते हैं.
नियमों की निगरानी के लिए पूर्व सरकारी वैज्ञानिक को सौंपी जिम्मेदारी
एसोसिएशन के सचिव के अनुसार, पर्यावरणीय नियमों और एनजीटी के दिशा-निर्देशों का सख्ती से पालन सुनिश्चित करने के लिए केंद्रीय भूजल बोर्ड (सीजीडब्ल्यूबी) के पूर्व वरिष्ठ वैज्ञानिक मुकेश कुमार गर्ग को एक विशेष पर्यावरण विशेषज्ञ के रूप में नियुक्त किया गया है. डीडीसीए ने हरित अधिकरण को भरोसा दिलाया है कि स्टेडियम प्रशासन ने पर्यावरण सुरक्षा से जुड़े कोर्ट के सभी पुराने निर्देशों का पूरी तरह से पालन कर लिया है. इन तमाम सकारात्मक बदलावों और पुख्ता इंतजामों का हवाला देते हुए एसोसिएशन ने एनजीटी से यह विनम्र अनुरोध भी किया है कि कोर्ट द्वारा जारी किए गए कारण बताओ नोटिस को अब पूरी तरह से वापस ले लिया जाए.
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