प्री-मानसून का कहर: इन राज्यों में जमकर बरसेंगे बादल
नई दिल्ली: देश में प्री-मानसून की सक्रियता ने मौसम का मिजाज पूरी तरह बदल दिया है। साल 2025 में हुई रिकॉर्डतोड़ बारिश के बाद, अब 2026 में भी इंद्रदेव के कड़े तेवर दिखने शुरू हो गए हैं। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने 1 मई से 4 मई के बीच देश के बड़े हिस्से में भारी बारिश, धूल भरी आंधी और ओलावृष्टि की चेतावनी जारी की है। हालांकि विशेषज्ञों ने इस साल 'अल-नीनो' के प्रभाव की आशंका जताई है, लेकिन वर्तमान में प्री-मानसून की दस्तक ने भीषण गर्मी से राहत के साथ-साथ चिंताएं भी बढ़ा दी हैं।
पहाड़ों पर आफत: उत्तराखंड और हिमाचल में जमकर बरसेंगे बादल
उत्तर भारत के पहाड़ी राज्यों में मौसम का सबसे ज्यादा असर देखने को मिलेगा। उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश के लिए मौसम विभाग ने 'येलो अलर्ट' जारी किया है। 1 से 4 मई के दौरान यहाँ न केवल भारी बारिश होगी, बल्कि 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चलने वाली हवाएं और बिजली गिरने की घटनाएं भी हो सकती हैं। पहाड़ी इलाकों में भूस्खलन और ओलावृष्टि की संभावना को देखते हुए पर्यटकों और स्थानीय निवासियों को सतर्क रहने की सलाह दी गई है।
दक्षिण भारत का हाल: केरल और कर्नाटक में प्री-मानसून का नया 'अवतार'
दक्षिण भारत में केरल, कर्नाटक और तमिलनाडु में मानसून से पहले की बारिश का रौद्र रूप देखने को मिल सकता है। केरल में अगले चार दिनों तक 30-50 किलोमीटर प्रति घंटे की गति से तूफानी हवाएं चलने और भारी बारिश का पूर्वानुमान है। इसके साथ ही आंध्र प्रदेश, तेलंगाना और रायलसीमा के इलाकों में भी बादलों की गर्जना के साथ तेज़ धूल भरी आंधी चलने की संभावना जताई गई है।
इन राज्यों में भी जारी किया गया अलर्ट
मौसम विभाग ने देश के लगभग सभी कोनों के लिए विस्तृत चेतावनी जारी की है। 1 से 4 मई के बीच निम्नलिखित क्षेत्रों में 40 से 70 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चलने और बारिश होने की संभावना है:
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उत्तर भारत: पंजाब, हरियाणा, राजस्थान, दिल्ली और उत्तर प्रदेश।
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पूर्व और पूर्वोत्तर: बिहार, झारखंड, पश्चिम बंगाल, ओडिशा, सिक्किम, असम, मेघालय और अरुणाचल प्रदेश।
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मध्य और पश्चिम भारत: मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और विदर्भ।
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केंद्र शासित प्रदेश: जम्मू-कश्मीर, लद्दाख, अंडमान-निकोबार और लक्षद्वीप।
सावधानी की अपील: मौसम विभाग ने धूल भरी आंधी और बिजली कड़कने के दौरान लोगों को सुरक्षित स्थानों पर रहने और पेड़ों के नीचे शरण न लेने की सलाह दी है। ओलावृष्टि से फसलों को होने वाले संभावित नुकसान को लेकर किसानों को भी सचेत किया गया है।
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